दोहरा लेखा प्रणाली क्या है ( What is Double Entry System Hindi )


What is Double Entry System Hindi

इस आर्टिकल में मैंने दोहरा लेखा प्रणाली क्या है । तथा दोहरा लेखा प्रणाली की परिभाषा , विशेषताएँ ,महत्त्व, सीमाएँ  तथा दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धान्त के बारे में बताया है । 

इस आर्टिकल में मैने इन टॉपिक के बारे में बताया है ।

Table of Contact

  • दोहरा लेखा प्रणाली का संक्षिप्त इतिहास
  • दोहरा लेखा प्रणाली के जन्मदाता कौन है 
  • दोहरा लेखा प्रणाली का आशय
  • दोहरा लेखा प्रणाली की परिभाषा
  • दोहरा लेखा प्रणाली की विशेषताएँ या लक्षण 
  • दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धान्त
  • दोहरा लेखा प्रणाली में लेखांकन के चरण या सोपान 
  • दोहरा लेखा प्रणाली के गुण या लाभ या उद्देश्य या महत्त्व 
  • दोहरा लेखा प्रणाली के दोष या सीमाएँ
  • निष्कर्ष

दोहरा लेखा प्रणाली का संक्षिप्त इतिहास ( Brief History of Double Entry System )

दोहरा लेखा प्रणाली के जन्मदाता कौन है ?

लेखाकर्म के विद्वानों की मान्यता है कि इस प्रणाली का आविष्कार 15 वीं शताब्दी में हुआ है । इसके जन्मदाता इटली के वेनिस शहर के निवासी लूकास पेसियोली ( Lucas Pacioli ) नामक पादरी माने जाते हैं ।

सन् 1494 में इन पादरी महोदय ने दोहरा लेखा प्रणाली पर इटली भाषा में एक पुस्तक लिखी , जिसका नाम डी कम्प्यूटर सेट स्क्रिपचरिस ' ( De Computiset Scripturis ) था । इस प्रणाली को इटली के व्यापारियों ने अपनाया और यह ' इटेलियन प्रणाली ' कहलायी ।

बाद में यह प्रणाली इंग्लैण्ड में अपनाई गई और सन् 1543 में ह्यूग ओल्ड कैसिल ( Houghold Castle ) नामक अंग्रेज ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद कर लंदन में प्रकाशित किया । तब से अंग्रेज व्यापारी भी इसे प्रयोग में लाने लगे ।

तत्पश्चात इस प्रणाली में अनेक परिवर्तन हुए । सन् 1795 में अनेक संशोधनों के साथ एडवर्ड जोन्स ( Edward Jones ) नामक एक अंग्रेज ने बहीखाता अंग्रेजी पद्धति ( English system of Book keeping ) के नाम एक पुस्तक की रचना की जिसमें सहायक पुस्तकों ( Subsidiary Books ) , तलपट ( Trial Balance ) आदि के प्रयोग करने का समावेश किया गया सार्वभौमिक सिद्धान्तों पर आधारित होने के कारण आज यह प्रणाली विश्वव्यापी हो गयी है ।

दोहरा लेखा प्रणाली का आशय ( Definition of Double Entry System in Hindi )

लेखांकन की यह प्रणाली द्वि - पक्षीय अवधारणा ( Duel Aspect Concept ) पर आधारित है । इसके अनुसार प्रत्येक व्यावसायिक व्यवहार के दो प्रभाव होते हैं , जो कि दो भिन्न - भिन्न खातों के विभिन्न पक्षों को प्रभावित करते हैं ।

किसी एक खाते के नाम पक्ष ( Debit side ) में और किसी दूसरे सम्बन्धित खाते के जमा पक्ष ( Credit side ) में लेखा किया जाता है । इस प्रकार प्रत्येक डेबिट के लिए उसका संगत क्रेडिट होता है ।

एक व्यवहार का लेखा दो खातों में एक साथ करने के कारण ही इसे दोहरा लेखा प्रणाली कहा जाता है ।

लेखा प्रणाली की आधुनिक अमेरिकन विचारधारा के अनुसार प्रत्येक वित्तीय व्यवहार संपत्ति , दायित्व , पूंजी , व्यय तथा आगम से सम्बन्धित रहते हैं ।

प्रत्येक व्यवहार इनमें से किसी न किसी में वृद्धि या कमी करता है । इस सिद्धांत के अनुसार सम्पत्ति एवं व्ययों में वृद्धि डेबिट तथा इनमें कमी को क्रेडिट किया जाता है । इसी प्रकार दायित्व , पूँजी एवं आय में कमी डेबिट एवं इनमें वृद्धि को क्रेडिट किया जाता है । 

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दोहरा लेखा प्रणाली की परिभाषा ( Definition of Double Entry System in Hindi )

विलियम पिकिल्स के शब्दों में , " दोहरा लेखा प्रणाली में प्रत्येक सौदे के दो रूपों को लिख जाता है - एक भाग पाने वाला होता है और दूसरा देने वाला अर्थात् प्रत्येक सौदे में एक खाता पाने वाला होता है और दूसरा खाता देने वाला होता है । पाने वाले खाते को नाम ( Debit ) और देने वाले खाते को जमा ( Credit ) किया जाता है । "

संक्षेप में दोहरा लेखा प्रणाली की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है

" दोहरा लेखा प्रणाली , लेखांकन की वह प्रणाली है , जिसके अनुसार प्रत्येक सौदे के दोनों रूपों में से एक को कुछ निश्चित नियमों के आधार पर लेखा पुस्तकों में डेबिट और दूसरे को क्रेडिट किया जाता है । "

दोहरा लेखा प्रणाली की विशेषताएँ या लक्षण ( ( Characteristics of Double Entry System in Hindi )

1. प्रत्येक सौदे का प्रभाव दो या अधिक खातों पर- इस प्रणाली में प्रत्येक व्यावसायिक सौदे या प्रभाव दो या अधिक खातों पर एक साथ पड़ता है , किन्तु प्रत्येक दशा में डेबिट एवं क्रेडिट पक्ष का योग है । समान रहता है ।

2. प्रत्येक खाते के दो भाग- इस प्रणाली में प्रत्येक खाते को दो भागों में बाँटा गया है । यहाँ ( Left side ) को डेबिट तथा दायीं ओर ( Right side ) को क्रेडिट कहा जाता है ।

3. प्रभावित खातों के परस्पर विपरीत पक्ष में लेखा- प्रभावित खातों में से नियमानुसार डेबिट पक्ष में और दूसरे के क्रेडिट पक्ष में लेखा किया जाता है ।

4. दोहरा प्रभाव- इसके अनुसार प्रत्येक डेबिट के लिये एक क्रेडिट होता है , जो तेज द्वि - पक्षीय अवधारणा पर आधारित है । 

5. निश्चित लेखा नियम- इस प्रणाली में प्रत्येक वित्तीय व्यवहार का लेखा निश्चित आधार पर किया जाता है ।

6. वैधानिक मान्यता- यह प्रणाली सम्पूर्ण विश्व में अपनायी जाती है एवं कम्पनी

7. तलपट का निर्माण सम्भव- इस प्रणाली के अन्तर्गत गणितीय शुद्धता की जांच के लिए खातों के शेषों अथवा योगों के आधार पर तलपट ( Trial Balance ) का निर्माण किया जा सकता है । 8. लेखांकन समीकरण- इस प्रणाली में प्रत्येक वित्तीय व्यवहार के प्रभाव को लेखांकन समीकरण ( Accounting Equation ) के रूप में दर्शाया जा सकता है । -

दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धान्त ( Principles of Double Entry System in Hindi )

दोहरा लेखा प्रणाली में व्यवहारों का लेखा करने के मूलभूत सिद्धांत निम्नलिखित हैं

1. दो खातों पर प्रभाव- दोहरा लेखा प्रणाली इस मान्यता पर आधारित है कि प्रत्येक लेन - देन का प्रभाव लेखा पुस्तकों में दो खातों पर पड़ता है , अर्थात् प्रत्येक व्यवहार दो खातों को प्रभावित करता है ।एक खाता लाभ पाने वाला और दूसरा लाभ त्यागने वाला होता है । 

उदाहरण के लिए , यदि विक्रेता व्यापारी द्वारा 10.000 रुपये का माल नकद बेचा जाता है तो इसमें रोकड़ खाता और विक्रय खाता दोनों ही प्रभावित होंगे ।

रोकड़ खाता लाभ पाने वाला और विक्रय खाता लाभ ( माल ) त्यागने वाला खाता होगा । जबकि क्रेता व्यापारी की पुस्तकों में क्रय खाता लाभ ( मूल्य ) याने वाला और रोकड़ खाता लाभ ( मूल्य ) त्यागने वाला खाता होगा ।

2. दोनों खातों में लेखा- किसी व्यवहार में जो खाते प्रभावित होते हैं उन दोनों ही खातों में लेखा करना अनिवार्य होता है । उक्त व्यवहार में रोकड़ खाता तथा विक्रय खाता दोनों में ही लेखा किया जाएगा ।

3. प्रत्येक खाते के दो पक्ष- इस प्रणाली के अनुसार प्रत्येक खाते के दो पक्ष होते हैं । एक पक्ष नाम ( Debit ) और दूसरा पक्ष जमा ( Credit ) कहलाता है । प्रत्येक व्यवहार एक खाते के सिर्फ एक पक्ष को ही प्रभावित करता है । एक खाते के दोनों पक्षों पर एक साथ कभी भी प्रभाव नहीं पड़ता है ।

4. विपरीत पक्षों में लेखा- दोहरा लेखा प्रणाली के इस सिद्धान्त के अनुसार जो दो खाते प्रभावित होते हैं , उनके विपरीत पक्षों में लेखा किया जाता है । एक खाते के डेबिट में तो दूसरे के क्रेडिट में लेखा होगा ।


दोहरा लेखा प्रणाली में लेखांकन के चरण  ( Stages of Accounting in Double Entry System in Hindi )

दोहरा लेखा प्रणाली में लेखांकन के सम्पूर्ण कार्य को निम्नलिखित तीन चरणों में विभाजित किया जाता है

1. प्रारम्भिक लेखा ( Original Records ) - जैसे ही कोई सौदा होता है तो व्यापारी उसे एक साधारण बही में लिख लेता है , ताकि सौदा याद रहे । इस बही को स्मारक बहीं कहते हैं ।

स्मारक बही से समस्त लेने - देनों का लेखा नियमानुसार नकल बही ( Journal ) में किया जाता है । यदि व्यापार का स्वरूप व्यापक है तो नकल बही को कई सहायक पुस्तकों ( Subsidiary Books ) में विभाजित कर लिया जाता है ।

नकल बही या सहायक बही में लेखा करने को " प्रारम्भिक लेखा " कहते हैं । इन बहियों ( पुस्तकों ) को प्रारम्भिक लेखे की पुस्तकें कहा जाता है ।

2. वर्गीकरण ( Classification ) - प्रारम्भिक लेखे की पुस्तकों में लेखा करने के पश्चात् व्यवहारों को दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धांत के अनुसार वर्गीकृत कर सम्बन्धित खातों में लिखा जाता है ।चूंकि इस श्रेणी में लेखों को वर्गीकृत किया जाता है , इसलिए इसे ' वर्गीकरण ' कहते हैं । 

वर्गीकरण जिस पुस्तक में होता है , उसे खाताबही ( Ledger ) कहते हैं । खाता बही में व्यक्ति , वस्तु और आय - व्यय के अलग - अलग खाते खोले जाते हैं ।

3. सारांश ( Summary ) - व्यापारिक वर्ष के अन्त में व्यापारी व्यापार का अंतिम परिणाम अर्थात् लाभ - हानि ज्ञात करने के लिए खातों का सारांश निकालता है । सारांश को अंतिम खाते कहा जाता है ।

अतिम खाते ( Final Accounts ) के मुख्य रूप से निम्न तीन भाग होते हैं

( 1 ) व्यापारिक खाता ( Trading Account ) - यह व्यापार की एक अवधि विशेष का सकल लाभ या हानि बताता है ।

( ii ) लाभ - हानि खाता ( Profit & Loss Account ) - यह व्यापार की उसी अवधि विशेष का शुद्ध लाभ या हानि बताता है ।

( iii ) चिट्ठा ( Balance Sheet ) - यह एक निश्चित तिथि को व्यापार की आर्थिक स्थिति की जानकारी देता है । चिट्ठे के आधार पर व्यापार के हितग्राही व्यापार की स्थिति का विश्लेषण भी करते हैं । -

दोहरा लेखा प्रणाली के गुण या लाभ या उद्देश्य या महत्त्व ( Merits or Advantages or Objects or Importance of Double Entry System in Hindi )

1. पूर्ण विवरण- इस प्रणाली के अनुसार प्रत्येक लेन - देन का लेखा दो खातों में किया जाता है , जिससे हर सौदे का पूरा विवरण ( Record ) पुस्तकों में मिल जाता है ।

2. विश्वसनीय सूचना- खाताबही में व्यक्तिगत , वास्तविक और आय - व्यय सम्बन्धी सभी खाते स्वतंत्र रूप से रखे जाते हैं , जिससे विभिन्न खातों की जानकारी मिलती रहती है ।

3. खातों की शुद्धता की जाँच- इस प्रणाली के सिद्धांत के आधार पर तलपट ( Trial Balance ) सुविधापूर्वक बनाया जा सकता है । तलपट से गणित सम्बन्धी शुद्धता की जाँच की जा सकती है ।

4. लाभ - हानि का ज्ञान- इस प्रणाली में व्यापारिक खाता और लाभ - हानि खाता बनाकर सकल लाभ या हानि ( Gross Profit or Gross Loss ) और शुद्ध लाभ या हानि ( Net Profit or Net Loss ) का ज्ञान सरलता से हो जाता है ।

5. चिठे का निर्माण- यह प्रणाली चिट्ठा ( Balance Sheet ) बनाने के लिए भी समस्त सामग्री प्रस्तुत करती है । व्यापारी चिट्ठा बनाकर अपने व्यापार की वित्तीय स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकता है ।

6. तुलनात्मक अध्ययन- इस प्रणाली पर रखे गये हिसाब - किताब की तुलना पिछले वर्ष के हिसाब से की जा सकती है , जो कि वैज्ञानिक और न्यायपूर्ण होती है ।

7. छल - कपट की कम संभावना- इस प्रणाली में व्यवहारों का दोहरा - लेखा होने के कारण गबन , छल - कपट लिए बहुत कम सम्भावना रहती है ।

8. वैज्ञानिक प्रणाली- यह प्रणाली अन्य प्रणालियों की अपेक्षा वैज्ञानिक प्रणाली है । इस प्रणाली में सभी प्रकार के खाते रखे जाते हैं , जिनसे सभी प्रकार की आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होती है ।

9. भूल - सुधार- इस प्रणाली में व्यवहारों के लेखांकन में यदि कोई भूल हो जाती है तो उसे आसानी से सुधारा जा सकता है ।

10. वैधानिक मान्यता- दोहरा लेखा प्रणाली को विभिन्न देशों में वैधानिक मान्यता प्राप्त है । इस पद्धति से रखे गए खातों को संसार भर में मान्यता मिली हुई है ।

11. नियंत्रण में सहायक- यह प्रणाली कर्मचारियों के कार्यों की जाँच करने में सहायक है । इसके द्वारा रोकड़ एवं स्टॉक आदि को आसानी से जांच कर कर्मचारियों पर नियंत्रण रखा जा सकता है ।

दोहरा लेखा प्रणाली के दोष या सीमाएँ ( Disadvantages or Limitations of Double Entry System in Hindi )

दोहरा लेखा प्रणाली पूर्ण वैज्ञानिक , व्यवस्थित और विश्वसनीय प्रणाली है , फिर भी दोष - मुक्त नहीं है । इसकी अपनी सीमाएँ हैं ।

ये निम्न प्रकार हैं

1. किसी व्यवहार की प्रविष्टि छूट जाना- सौदों का लेखा करने में यदि किसी व्यवहार का लेखा करना रह जाता है तो इसका पता लगाना एक दुष्कर कार्य है ।

2. गलत रकम लिखना- यदि किसी व्यवहार की प्रविष्टि करते समय गलत रकम लिखी जाए तो ऐसी अशुद्धि का भी पता नहीं चल सकता ।

3. क्षतिपूरक अशुद्धियाँ- यदि किसी खाते के एक पक्ष में रकम कम या अधिक लिखा जाए और उतनी ही रकम किसी अन्य खाते के उसी पक्ष में अधिक या कम लिखा जाए या फिर किसी खाते के विपरीत पक्ष में कम या अधिक लिखा जाए तो ऐसी क्षतिपूरक अशुद्धि का भी पता चलना कठिन होता है ।

4. गलत खाते में लेखा- यदि सही खाते की बजाय किसी दूसरे खाते में लेखा हो जाता है तो इसका भी पता नहीं चलता है ।

5. खर्चीली प्रणाली- दोहरा लेखा प्रणाली में अनेक प्रकार की बहियाँ रखनी पड़ती हैं । इनमें लेखा करने के लिए प्रशिक्षित व्यक्तियों की आवश्यकता होती है , जिन्हें अधिक पारिश्रमिक देना पड़ता है । अतः इसे खर्चीली प्रणाली माना जाता है

6. नियमों की जटिलता- दोहरा लेखा प्रणाली में जटिलता व्यवहारों को डेबिट और क्रेडिट करने के नियमों के कारण होती है । डेबिट और क्रेडिट की त्रुटि से हिसाब गलत होने की आशंका बनी रहती है ।

निष्कर्ष  ( Conclusion )

मैं उम्मीद करता हूं कि आप जान गए होंगे कि Double Entry System क्या होता है ? What is Double Entry System Hindi , दोहरा लेखा प्रणाली की परिभाषा क्या है। यदि आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा तो हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं । यदि आप के मन में Double Entry System से सम्बन्दित कोई सवाल है तो आप मुझ से कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है मै उनका जवाब देने की कोशिश करुगा ।

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